30 साल में पहली बार कश्मीर में लैंडलाइन तक बंद, लद्दाख में लोग जश्न मनाने सड़कों पर उतरे

श्रीनगर (जफर इकबाल).कश्मीर पर हुए इस सबसे बड़े फैसले के दिन जम्मू से श्रीनगर तक पूरी तरह धारा-144 लगी रही। कश्मीर में इंटरनेट बंद होना नई बात नहीं है। लेकिन, 30 साल में पहली बार इंटनेट के साथ मोबाइल फोन, ब्रॉडबैंड इंटरनेट और लैंडलाइन फोन भी बंद कर दिए गए हैं। कश्मीर का संपर्क बाकी देश से कटा हुआ है।

सैटेलाइट फोन और ओबी वैन ही हैं, जो कश्मीर की बातों को बाहर पहुंचा रही हैं। सड़कें 4 अगस्त की रात से सूनी हैं। इक्का-दुक्का एम्बुलेंस या फिर अस्पताल की गाड़ियां ही सड़कों पर नजर आई हैं। जम्मू-कश्मीर के सभी स्कूल-कॉलेज बंद रहे। बाजार भी बंद रहे। सड़कों पर सिर्फ सुरक्षाबलों के जवान गश्त करते नजर आए। लोगों ने घरों में दो महीने का राशन जमा कर लिया है।

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सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की वजह से कहीं से कोई हिंसा की खबर नहीं हैं, न ही कहीं विरोध प्रदर्शन हुआ है। श्रीनगर के अति संवेदशनशील इलाकों में जनसंख्या से डेढ़ गुना जवान तैनात किए गए हैं। सुरक्षा एडवाइजरी जारी होने के बाद पर्यटक घाटी से निकल चुके हैं। पिछले 48 घंटे में 18 हजार से ज्यादा पर्यटकों ने कश्मीर छोड़ दिया है। अब घाटी में कोई भी पर्यटक नहीं है। संसद में घाेषणा के बाद मुख्यधारा के नेताओं के बयान जरूर आए, लेकिन घाटी में अलगाववादी और उनके समर्थक अभी चुप हैं।

उधर, कश्मीर से अलग होने जा रहे लद्दाख में न इंटरनेट बंद हुआ, न फोन। लेह के लोग सरकार के फैसले से खुश हैं। 2.5 लाख जनसंख्या में से लेह में 1.25 लाख लोग रहते हैं। वहीं, करगिल में इसे लेकर असंतोष है।

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कश्मीर में सन्नाटा।