सफाईगीरी अवॉर्ड: शाहिद बोले- साफ रहें, मोहल्ला अपने आप साफ हो जाएगा

  • ‘त्रियांश टॉयलेट’ के लिए IIT कानपुर के डॉ. तारे को मिला टेक आइकॉन अवॉर्ड
  • शाहिद माल्या बोले- गले की सफाई किए बिना कोई बड़ा गायक नहीं बन सकता

एक कुड़ी, जिदा नाम मोहब्बत…गाने के मशहूर सिंगर शाहिद माल्या ने इंडिया टुडे सफाईगीरी समिट में ‘टेक आइकॉन अवॉर्ड’ की शुरुआत की. इस सेशन को आजतक एडिटोरिल की असोसिएट एक्जिक्यूटिव प्रोड्सूर मीनाक्षी कंडवाल ने मॉडरेट किया. कार्यक्रम में शाहिद माल्या ने सफाईगीरी के बारे में कहा कि जब तक गायक गले की सफाई नहीं करता, तब तक वो बड़ा गायक नहीं बन सकता. वैसे ही हर इंसान को अपनी जिंदगी में साफ-सफाई की अहमियत समझनी चाहिए.

शाहिद माल्या ने फिल्म इंडस्ट्री में जगह बनाने के लिए 20 साल तक स्ट्रगल किया. यहां तक कि गुरुद्वारे में शबद गाए, करियर बनाने के लिए काफी मेहनत की. आज फिल्म इंडस्ट्री में उनका अच्छा नाम है. लंबे दिनों के स्ट्रगल से जुड़े एक सवाल के जवाब में शाहिद ने कहा, जहां स्ट्रगल न हो वहां काम का मजा नहीं होता. शाहिद ने स्ट्रगल को लर्निंग बताया और कहा कि अपनी जिंदगी में काफी कुछ सीखा है और मंजिल सीखने से ही मिलती है. साफ-सफाई से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, कलाकार के लिए भी सफाईगीरी जरूरी है क्योंकि उसे बार बार अपना गला साफ करना पड़ता है. इसी तरह हम सबकी जिंदगी में सफाईगीरी काफी मायने रखती है.  

स्वच्छता का मतलब समझाया

शाहिद माल्या के लिए स्वच्छता का क्या मतलब है? इसके जवाब में उन्होंने कहा, हर कदम पर सफाई की जरूरत है. घर से लेकर, गली से लेकर, मोहल्ले से लेकर हर जगह सफाई की जरूरत है. अपना घर साफ रखना जरूरी है. अगर हम अपना घर साफ रखें तो इससे पूरा देश साफ हो जाएगा. शाहिद ने कहा, यह मुहिम होनी चाहिए कि पहले खुद को साफ रखो, फिर अपने घर को. इससे मोहल्ला अपने आप साफ हो जाएगा. सिंगर शाहिद माल्या ने बताया कि उन्होंने खुद फैसला किया है कि वे कभी टिश्यू पेपर या प्लास्टिक खुले में नहीं फेंकेंगे.  

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ट्रेनों में अक्सर गंदगी देखने को मिलती है. लोग मूंगफली और संतरे के छिलके फेंकते हैं. इससे जुड़े एक सवाल पर शाहिद माल्या ने कहा, अब ऐसा कम देखने को मिलता है क्योंकि लोगों में बदलाव हो रहा है. ये अच्छी बात है. इसे आगे भी जारी रखना होगा. लोग सफाई को लेकर जागरूक हो रहे हैं.

बदल रहा म्यूजिक का ट्रेंड

शाहिद माल्या क्लासिकल म्यूजिक को लेकर बहुत कुछ कर रहे हैं और इससे वे काफी हद तक जुड़े हुए भी हैं लेकिन ट्रेंड काफी कुछ बदल रहा है. पुरानी फिल्मों के बिट्स, पुराने गाने को यूज कर कुछ नया किया जा रहा है. इस सवाल पर शाहिद माल्या ने कहा, दौर बदलता है और गानों के साथ भी वही हो रहा है. आज म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट ज्यादा बढ़ गए हैं, इसलिए सिंगर भी इंस्ट्रूमेंट बन कर रह गया है लेकिन अच्छा म्यूजिक बन रहा है. अच्छे श्रोता भी हैं. जिसकी जैसी पसंद है, उसे वैसा म्यूजिक मिल रहा है.  

विनोद तारे को टेक आईकॉन अवॉर्ड

इंडिया टुडे सफाईगीरी अवॉर्ड्स 2019 के तहत दिया जाने वाला टेक आइकॉन अवॉर्ड डॉ. विनोद तारे को मिला. हालांकि अवॉर्ड लेने के लिए वे मंच पर मौजूद नहीं थे, इसलिए उनकी जगह आईआईटी कानपुर के रजिस्ट्रार प्रमोद तिवारी ने यह सम्मान ग्रहण किया.  

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आईआईटी कानपुर ने सॉलिड और लिक्विड वेस्ट को अलग करने के लिए एक टेक्नोलॉजी तैयार की है जिसका अभी हाल में बीते प्रयागराज कुंभ में इस्तेमाल किया गया. इसके बारे में डॉ. प्रमोद तिवारी ने बताया, यह कोई मशीन नहीं है बल्कि टॉयलेट है. कुंभ मेले के दौरान यूजर फ्रेंडली इसी टॉयलेट के लिए यह अवॉर्ड मिला है. यह कोई बहुत बड़ी टेक्नोलॉजी नहीं है. इसके प्रणेता आईआईटी कानपुर के डॉ. प्रो. विनोद तारे हैं. आईआईटी कानपुर में इसके अतिरिक्त भी सफाई के लिए बहुत कुछ काम चल रहे हैं.

जिस टॉयलेट निर्माण के लिए अवॉर्ड मिला है, वह स्टेशरी भी है और साथ में यूजर फ्रेंडली भी. कुंभ मेले में इसके 56 यूनिट दिए गए. इस टॉयलेट का नाम था ‘त्रियांश टॉयलेट’. तीन अंश से बना जिसमें यूरीन, क्लीनिंग वाटर और मैन्यूअल फिकल मैटर. इन तीनों को अलग करने की टेक्नोलॉजी इस टॉयलेट में इस्तेमाल की गई. अंत में तीनों अशों को हटाकर उसकी कंपोस्टिंग कर दी जाती है.

प्रमोद तिवारी ने कहा, यह एक ऐसा प्रयोग है जिसे आम लोग भी अफोर्ड कर सकते हैं. ऐसे टॉयलेट उन जगहों पर ज्यादा कारगर सिद्ध हो सकते हैं जहां बाढ़ जैसी समस्या खड़ी होने पर टॉयलेट फ्लोट करने लगते हैं. इस टॉयलेट में लिक्विड और सॉलिड वेस्ट को अलग करना है, फिर उसकी कंपोस्टिंग कर दी जाती है. आईआईटी कानपुर में मंदिरों में इकट्ठा होने वाले फूल की री-साइक्लिंग के लिए टेक्नोलॉजी बनाई जा रही है. इससे काफी मात्रा में जमा होने वाले फूलों की सफाई की जा सकेगी.

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कविता से सफाई का संदेश

अंत में शाहिद ने अपनी खुद की कविता सुना कर इस सेशन का अंत किया. कविता की कुछ पंक्तियां हैं-

वो झाड़ू है वो कटका है, वो पोचा है वो फटका है

पर साफ करेगा कौन, इसी मुद्दे पर हर कोई अटका है

कोई मारे पान की पिचकारी, कोई गुटखे की लहर उड़ाता है

और सोच ही बस रखते हैं, क्या बाप का उनके जाता है

जो मुंह न रख पाए साफ तो समझो किस लेवल पर भटका है…

बता दें, इंडिया टुडे सफाईगीरी अवॉर्ड एक ऐसा मंच है जहां सफाई के दूतों को सम्मानित किया जाता है. उन व्यक्तियों, संगठनों और संस्थाओं को पुरस्कृत किया जाता है जो स्वच्छ भारत की दिशा में काम कर रहे हैं और इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. पिछले 4 वर्षों में इंडिया टुडे सफाईगीरी अवार्ड्स ने एक ऐसा वातावरण तैयार किया जहां लोग, संगठन स्वच्छता को लेकर एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करने लगे हैं.

इसी कड़ी में बुधवार को सफाईगीरी अवॉर्ड्स का पांचवां संस्करण आयोजित किया गया. दिल्ली में इस कार्यक्रम में कला, राजनीति, खेल जैसे क्षेत्र के दिग्गज शामिल होते हैं. इंडिया टुडे के मंच से वो सफाई को लेकर अपनी बात रखते हैं. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद होंगे. कार्यक्रम में मौजूद लोगों को राष्ट्रपति कोविंद संबोधित करेंगे.

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