छठ पर्व: नहाय-खाए के बाद आज है खरना

डिजिटल डेस्क। बिहार में मनाए जाने वाले छठ पर्व की शुरुआत 31 अक्टूबर से हो चुकी है। बता दें कि कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से देवी छठ माता की पूजा अर्चना शुरू हो जाती है और सप्तमी तिथि की सुबह तक चलती है। आइए जानते हैं किस दिन होगी कौन सी पूजा…

ये पर्व शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को नहाय-खाय से शुरु होता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है इस दिन छठ व्रत रखने वाले श्रद्धालु स्नान करके भोजन करते हैं। आम दिनों में भी लोग स्नान करके भोजन करते हैं लेकिन इस दिन कुछ विशेष रीति-रिवाजों और नियमों का पालन करना होता है। इसलिए इसे नहाय-खाए ही नाम दिया गया है। इस दिन व्रती किसी नदी या तालाब में जाकर डुबकी लगाते हैं, इसके बाद सूर्य और छठी मईया का ध्यान कर व्रत के पीरा होने की कामना करते हैं।

आज है खरना 
नहाय-खाए के बाद बाद खरना होता है। खरना इस पूजा का दूसरा चरण होता है। पूजा का ये दूसरा चरण सबसे कठिन होता है। जिसमें व्रती को निर्जला उपवास रखना होता है। शाम को पूजा के बाद खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। अथर्ववेद के अनुसार षष्ठी देवी भगवान भास्कर की मानस बहन हैं। प्रकृति के छठे अंश से षष्ठी माता उत्पन्न हुई हैं। उन्हें बच्चों की रक्षा करने वाले भगवान विष्णु द्वारा रची माया भी माना जाता है। इसीलिए बच्चे के जन्म के छठे दिन छठी पूजा की जाती है, ताकि बच्चे के ग्रह-गोचर शांत हो जाएं।

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जानिए कब है छठ पूजा

31 अक्टूबर: छठ पूजा नहाय-खाए  
1 नवम्बर: खरना का दिन  
2 नवम्बर: छठ पूजा संध्या अर्घ्य का दिन  
3 नवम्बर: उषा अर्घ्य का दिन  

पूजा के लिए शुभ मुहूर्त

पूजा का दिन- 2 नवंबर, शनिवार
पूजा के दिन सूर्योदय का शुभ मुहूर्त- 06:33
छठ पूजा के दिन सूर्यास्त का शुभ मुहूर्त- 17:35
षष्ठी तिथि आरंभ- 2 नवंबर/ 00:51  
षष्ठी तिथि समाप्त- 3 नवंबर/ 01:31  

महत्व
ऐसा माना जाता है कि एक बार पांडव जुए में अपना सारा राज-पाट हार गए। तब पांडवों को देखकर द्रौपदी ने छठ का व्रत किया था। इस व्रत के बाद दौपद्री की सभी मनोकामनाएं पूरी हुई थीं। तभी से इस व्रत को करने की प्रथा चली आ रही है। परंपरा के अनुसार छठ पर्व के व्रत को स्त्री और पुरुष समान रूप से रख सकते हैं। छठ पूजा की परंपरा और उसके महत्व का प्रतिपादन करने वाली पौराणिक और लोककथाओं के अनुसार यह पर्व सर्वाधिक शुद्धता और पवित्रता का पर्व है।

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एक मान्यता के अनुसार लंका पर विजय प्राप्‍त करने के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी यानी छठ के दिन भगवान राम और माता सीता ने व्रत किया था और सूर्यदेव की आराधना की थी। सप्तमी को सूर्योदय के समय फिर से अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था।

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